झामुमो-कांग्रेस गठबंधन के बाद ‘बाबूलाल मरांडी’ का Exclusive इन्टरव्यू,पार्ट-1

भाजपा के खिलाफ विपक्ष को एकजुट करने के ताजा प्रयास के रूप में यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी ने सभी विपक्षी दलों के नेताओं को अपने आवास पर रात्रिभोज पर आमंत्रित किया था जिसमेें झारखंड की ओर से हेमंत सोरेन के अलावा झाविमो प्रमुख बाबूलाल मरांडी भी शामिल हुये। डीनर के बाद बाबूलाल मरांडी ने ‘झारपोस्ट’ से राज्य के कई अहम मुद्दों पर चर्चा की, पेश है ये एक्सक्लुसिव इन्टरव्यू…

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Photo- Twitter

झारपोस्ट- सर आज सोनिया गांधी ने जो विपक्षी दलों को डिनर पर बुलाया था, उसमें आप भी शामिल हुये झारखंड के संदर्भ में क्या बातचतीत हुई?

बाबूलाल मरांडी- अभी झारखंड के संदर्भ में कोई बातचीत नहीं हुई है, ना ही गठबंधन के संदर्भ में भी कोई बात हुई है।

सवाल- लेकिन राज्यसभा में तो आपकी पार्टी झामुमों-कांग्रेस गठबंधन को वोट कर रही है?

बाबूलाल- राज्यसभा में तो हमने शुरु से ही कहा हैं…एक तो हमारे पास 2 ही विधायक हैं, तो हम अपना दावा तो कर नहीं सकते, और बीजेपी को हम वोट दे नहीं सकते, तो हमारा वोट गठबंधन को ही जायेगा।

झारपोस्ट- अगर आगामी लोकसभा और विधानसभा चुनावों की बात करें तो क्या आपकी पार्टी झामुमों-कांग्रेस गठबंधन के साथ जायेगी ?

बाबूलाल- देखिय मैने तो शुरु से ही कहा है कि गठबंधन हो या महागठबंधन हमें इससे कोई परहेज नहीं, शुरु से ही हम इसके पक्षधर रहे हैं, मैं शुरु से इसलिये कह रहा हूं क्योंकि जब 2006 में हमने पार्टी बनाई थी, तो उसके बाद हम अपने पहले चुनाव 2009 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के साथ मिलकर चुनाव लड़ा था, तब अच्छे परिणाम आये थे। किन्हीं कारणों से 2014 में हम गठबंधन नहीं कर पाये लेकिन 2019 के लोकसभा में हमलोग कोशिश कर रहे हैं कि मिलकर ही चुनाव लड़ें।

झारपोस्ट- पिछले विधानसभा की बात करें तो आपकी पार्टी 10% वोट शेयर के साथ 8 सीटें जीतनें में कामयाब रही थी, लेकिन आपके 6 विधायक भाजपा में शामिल हो गये? चूकि आपकी पार्टी के कई विधायक अब आपके पास नहीं रहे तो आनेवाला विधानसभा चुनाव कितना मुश्किल रहेगा आपके लिए?

बाबूलाल- देखिये मुश्किल कुछ नहीं है अगर हम जनता को विश्वास दिला पायें…और हम इस काम में लगे हुये हैं।

झारपोस्ट के सवालों का जवाब देते हुऐ बाबूलाल

“चूकि झारखंड प्रदेश में जितने भी राजनितिक दल या नेता हैं प्रत्यक्ष या परोक्ष रुप से सब सत्ता पर बैठ चूके हैं…चाहे वो JMM हो, BJP हो या Congress हो, हम भी 28 महीने तक मुख्यमंत्री रहे, तो लोगों ने सबके काम को देख लिया है…लेकिन एक जो बचा खुचा था ‘पूर्ण बहुमत-संपूर्ण विकास’ लोगों ने इसबार ये भी पूरी कर दी।

कहने का अर्थ है कि लोगों ने सबको जांच-परख लिया, तो मुझे लगता है कि इसबार जब लोग मतदान करेंगे तो सबके गुण दोष को कसौटी पर तौलकर ही मतदान करेंगे”- झाविमो प्रमुख, बाबूलाल मरांडी।

पिछले सवाल का शेष जवाब…

17-18 बर्षों में लोगों ने सबको देख लिया, अब देखनें के लिये कुछ बचा नहीं है, जितना प्रयोग होना था सब हो लिया, अन्तिम बचा हुआ था जो बीजेपी ने पिछली बार स्लोगन दिया था ‘पूर्ण बहुमत-संपूर्ण विकास’, लोगों को लगता था कि की गठबंधन सरकार है, अस्थिर सरकार है तो विकास नहीं होता तो लोगों ने ये भी पूरी कर दी।

बीजेपी लोगों के कान-कान में प्रचार करती थी कि अभी तक ट्राईबल मुख्यमंत्री रहे इसलिऐ राज्य का विकास नहीं हुआ, गैर आदिवासी सीएम होगों तो राज्य का विकास होगा, तो वो भी हो गया, पूर्ण बहुमत भी हो गया लेकिन परिणाम क्या हुआ? सब लोगों के सामने है…

अब मुझे लगता है कि 2019 के जो चुनाव होगें उसमें जनता नेता को भी और पार्टी को भी कसौटी पर कस के और जांच-परख के ही वोट देगी और मैं समझता हूँ कि झारखंड विकास मोर्चा किसी से भी कम नहीं रहेगी। क्योंकि झारखंड विकास मोर्चा ही एकमात्र पार्टी है जिस दिन से ये बनी है, जनता के बीच ये लगातार संघर्ष ही कर रही है- झाविमो प्रमुख, बाबूलाल मरांडी।

कुछ और अहम सवालों के जवाब अगली कड़ी में…

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